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स्त्री (कविता)

हमने एक छत के बदले में
तुम्हारा आसमान छीन लिया
तुम्हारी जमीन तय कर दी
और खींच दी एक लक्ष्मण रेखा
जिससे तुम्हारा बाहर निकलना वर्जित है।
बांट दिए तुम्हारे हिस्से में वो सारे काम
जिन्हें करने के लिए घोंटना पड़ता है
अपने सपनो का गला।
और जब तुमने अपनी
परिधि स्वीकार कर ली
तुम सबसे पहले जागी,
सबसे अंत मे सोई
और सबके बाद भोजन किया।
और हमने तुम्हे गौरवान्वित किया कि
तुम एक महान कर्तव्य के लिए
त्याग कर रही हो।
तुम्हारे लिए मंत्र, श्लोक और गीत रचे
और तुम्हारी पूजा शुरू कर दी।
हमने तुम्हे ईश्वर बना डाला
और तुमने भूला दिया कि तुम
भी एक इंसान हो।
- suyash mishra 'sajal'

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