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कायाकल्प (मुंशी प्रेमचंद)

कायाकल्प' मुंशी प्रेमचंद का एक प्रसिद्ध उपन्यास है। इस उपन्यास में प्रेमचंद ने मुख्य रूप से साम्प्रदायिकता की समस्या को उठाया है। उपन्यास में दोनों धर्मों के कुछ अवसरवादी तत्वों के द्वारा दंगो की आड़ में अपने स्वार्थ को साधने का यथार्थ चित्रण किया गया है। इस कहानी का मुख्य पात्र 'चक्रधर' है जिसमें समाजसेवा की प्रबल भावना है। चक्रधर जमींदार की पुत्री मनोरमा से प्रेम करता है लेकिन उनका विवाह नही हो पता है। बाद में वह सारी परम्पराओं को ठुकराकर एक मुस्लिम परिवार की विधवा से शादी करता है।
उपन्यास के कथानक के समानांतर एक पुनर्जन्म की कहानी भी चल रही है। जगदीशपुर की विलासप्रिय रानी देवप्रिया को जब अपने पूर्वजन्म का पति मिल जाता है तब वह अपनी जागीर विशाल सिंह को सौंप कर चली जाती है।
प्रेमचंद ने कायाकल्प में अलौकिकता का सृजन कर उसे सामयिक संदर्भों से जोड़ने का प्रयास किया है। उपन्यास में जागीरदारों द्वारा चमारों के शोषण, कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार और अंग्रेजी हुकूमत के हिंसक स्वरूप का वर्णन किया गया है। मूल संवेदना में चक्रधर का जीवन संघर्ष है जो पाठकों को प्रभावित किये बिना नहीं छोड़ता है।

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